राहु पूजा विधि, राहु शांति के उपाय और पूजा कब करें
राहु पूजा, जिसे राहु शांति पूजा भी कहते हैं, छाया ग्रह राहु के लिए की जाने वाली पारंपरिक प्रार्थना है। इसमें संकल्प, गणेश पूजन, नवग्रह पूजन, राहु का आवाहन और पूजन, राहु बीज मंत्र ‘ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः’ का जाप, दूर्वा से हवन और आरती होती है। परिवार प्रायः राहु की महादशा या अंतर्दशा में यह पूजा करवाते हैं; दिन और मुहूर्त पंडित जी पंचांग देखकर तय करते हैं, और जाप की संख्या भी वही बताते हैं।
- देहरादून में शुल्क
- राहु शांति पूजा ₹21,000
- कालीमठ मंदिर में
- ₹5,000 अतिरिक्त, मंदिर के अपने पुजारी द्वारा
- पूजा करते हैं
- पंडित श्री प्रकाश बेंजवाल जी (देहरादून) · पंडित श्री हर्ष देवशाली जी (कालीमठ मंदिर)
- बुकिंग
- व्हाट्सऐप · +91 99772 50909
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राहु क्या है और राहु पूजा क्यों की जाती है?
वैदिक ज्योतिष के नौ ग्रहों में राहु और केतु को छाया ग्रह कहा जाता है, क्योंकि इनका कोई भौतिक शरीर नहीं है। खगोल की भाषा में राहु वह बिंदु है जहाँ चंद्रमा का मार्ग सूर्य के मार्ग को काटता है। ज्योतिष में राहु और केतु हमेशा एक-दूसरे के ठीक सामने, यानी 180 अंश पर, माने जाते हैं।
पुराणों में समुद्र मंथन की कथा आती है। अमृत बाँटते समय स्वर्भानु नाम का एक असुर देवताओं की पंक्ति में बैठ गया और उसने अमृत पी लिया। सूर्य और चंद्र ने उसे पहचान लिया, और भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से उसका सिर अलग कर दिया। अमृत पी लेने के कारण वह अमर हो गया: उसका सिर राहु और धड़ केतु कहलाया। इसी कथा के कारण परंपरा में ग्रहण को राहु-केतु से जोड़ा जाता है।
विंशोत्तरी दशा पद्धति में राहु की महादशा 18 वर्ष की मानी जाती है। ज्योतिष में राहु को हमेशा अशुभ नहीं माना जाता; कुंडली में उसकी स्थिति के अनुसार उसके प्रभाव को अलग-अलग तरह से पढ़ा जाता है। राहु पूजा एक प्रार्थना है, जिसे परिवार श्रद्धा से, मन की शांति और संतुलन के लिए करवाते हैं।
राहु शांति पूजा और राहु महादशा पूजा
राहु शांति पूजा राहु के लिए की जाने वाली सामान्य शांति पूजा है। जब राहु की महादशा चल रही हो, तो कई परिवार इसी समय के लिए विशेष पूजा करवाते हैं, जिसे राहु महादशा पूजा कहा जाता है। दोनों की मूल विधि लगभग एक जैसी है; अंतर संकल्प और जाप के विस्तार में होता है, जो पंडित जी अवसर के अनुसार तय करते हैं। राहु के साथ केतु और बाकी ग्रहों की प्रार्थना करनी हो, तो हमारी नवग्रह पूजा विधि गाइड भी देखें। सभी नौ ग्रहों की पूजा करवानी हो, तो देहरादून में नवग्रह पूजा की जानकारी भी उपलब्ध है।
राहु पूजा कब करें: पूजा का सही समय
राहु पूजा के लिए कोई एक दिन पूरे वर्ष के लिए तय नहीं है। सही दिन, तिथि और मुहूर्त पंडित जी पंचांग और जिसके लिए पूजा हो रही है उसकी जानकारी देखकर बताते हैं। नीचे दी गई बातें केवल सामान्य परंपरा की जानकारी हैं।
किन स्थितियों में परिवार राहु पूजा करवाते हैं
- जब कुंडली में राहु की महादशा या अंतर्दशा चल रही हो।
- जब कुंडली देखने पर राहु की किसी स्थिति के बारे में प्रार्थना करने की इच्छा हो।
- जब परिवार किसी नए आरंभ से पहले, श्रद्धा से, राहु के लिए शांति की प्रार्थना करना चाहे।
- कुछ परिवार अपनी परंपरा के अनुसार ग्रहण के बाद या किसी विशेष तिथि पर भी यह पूजा करवाते हैं।
दिन
बहुत-सी परंपराओं में राहु से जुड़ी पूजा और जाप के लिए शनिवार को उपयुक्त माना जाता है। कुछ क्षेत्रों में अलग दिन भी चुना जाता है। आपके परिवार की रीति क्या है, यह भी पंडित जी को बताएँ, ताकि वे उसी के अनुसार दिन सुझा सकें।
राहु काल क्या है
राहु काल हर दिन का लगभग डेढ़ घंटे का एक समय है, जो सप्ताह के दिन और उस स्थान के सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार बदलता रहता है। परंपरा में राहु काल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचा जाता है। वहीं कुछ पंडित राहु के मंत्र जाप के लिए इसी समय को चुनते हैं। इसलिए राहु काल में पूजा हो या नहीं, यह निर्णय पंडित जी पर ही छोड़ें। देहरादून का राहु काल रोज़ के पंचांग में देखा जा सकता है।
किन समयों से बचा जाता है
सामान्यतः सूतक या पातक के दिन और परिवार की रीति के अनुसार वर्जित दिनों में पूजा टाली जाती है। ऐसी कोई स्थिति हो तो बुकिंग के समय पहले ही बता दें।
राहु पूजा विधि
नीचे राहु शांति पूजा की सामान्य पारंपरिक विधि दी गई है। वास्तविक पूजा में पंडित जी अपनी परंपरा और उद्देश्य के अनुसार क्रम या विस्तार में बदलाव कर सकते हैं, इसलिए पूजा योग्य पंडित से ही करवाएँ।
1. तैयारी और शुद्धि
यजमान स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं। परंपरा में राहु से जुड़े रंग नीला और काला माने जाते हैं, इसलिए कई जगह राहु के आसन या वस्त्र के लिए इन्हीं रंगों का प्रयोग होता है। आचमन और पवित्रीकरण के बाद दीपक जलाकर पूजा आरंभ होती है।
2. संकल्प
हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प लिया जाता है, जिसमें तिथि, स्थान, यजमान का नाम, गोत्र (यदि पता हो) और राहु शांति का उद्देश्य बोला जाता है।
3. गणेश पूजन, कलश स्थापना और नवग्रह पूजन
पूजा श्री गणेश के पूजन से आरंभ होती है। इसके बाद कलश स्थापना और नवग्रहों का आवाहन किया जाता है। किसी एक ग्रह की शांति पूजा में भी सभी नौ ग्रहों का पूजन परंपरा का हिस्सा है।
4. राहु का आवाहन और पूजन
नवग्रह मंडल में राहु का स्थान नैऋत्य, अर्थात् दक्षिण-पश्चिम दिशा में माना जाता है। राहु का विशेष आवाहन करके गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य से पूजन किया जाता है। कई परंपराओं में राहु के अधिदेवता के रूप में देवी का भी पूजन किया जाता है।
5. राहु मंत्र जाप
इसके बाद राहु बीज मंत्र या वैदिक मंत्र का जाप होता है। जाप शांत मन से, शुद्ध उच्चारण के साथ और नियमित गति से किया जाता है। जाप की संख्या पंडित जी पूजा के उद्देश्य के अनुसार बताते हैं।
6. हवन
जाप पूरा होने के बाद हवन किया जाता है। राहु के लिए हवन में दूर्वा को पारंपरिक समिधा माना गया है। मंत्र के साथ घी और हवन सामग्री की आहुति दी जाती है और अंत में पूर्णाहुति होती है।
7. आरती, क्षमा प्रार्थना और दान
पूजा आरती और क्षमा प्रार्थना के साथ पूरी होती है। परंपरा में राहु से जुड़ी वस्तुओं का दान अपनी सामर्थ्य के अनुसार किया जाता है। दान श्रद्धा से करें, किसी दबाव या डर से नहीं।
राहु मंत्र
राहु बीज मंत्र
ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
यह राहु का सबसे प्रचलित बीज मंत्र है। जाप प्रायः 108 मनकों की माला से किया जाता है। कितनी माला या कुल कितना जाप करना है, यह पंडित जी आपकी स्थिति और परंपरा के अनुसार बता सकते हैं, इसलिए जाप की संख्या उन्हीं से पूछकर तय करें।
राहु का पौराणिक मंत्र (नवग्रह स्तोत्र से)
अर्धकायं महावीर्यं चन्द्रादित्यविमर्दनम्।
सिंहिकागर्भसम्भूतं तं राहुं प्रणमाम्यहम्॥
इसका भाव है: जिनका आधा शरीर है, जो महापराक्रमी हैं, जो सूर्य और चंद्र को ग्रसते हैं और जो सिंहिका के गर्भ से उत्पन्न हुए हैं, उन राहु को मैं प्रणाम करता हूँ।
जाप कैसे करें
- स्नान के बाद, स्वच्छ स्थान पर, शांत मन से बैठें।
- मंत्र का उच्चारण धीरे और स्पष्ट करें; सही उच्चारण पंडित जी से सीख लें।
- संख्या से अधिक नियमितता और श्रद्धा को महत्व दें।
- जाप शुरू करने से पहले श्री गणेश और अपने इष्ट देवता का स्मरण करें।
राहु शांति के उपाय
परंपरा में राहु शांति के लिए कुछ सरल उपाय बताए जाते हैं। ये श्रद्धा और आचरण से जुड़े हैं। इन्हें अपनाना या न अपनाना आपकी इच्छा है, और इनसे किसी परिणाम का वादा नहीं किया जाता।
मंत्र जाप और प्रार्थना
राहु बीज मंत्र का नियमित जाप सबसे सरल उपाय माना जाता है। इसके लिए किसी बड़े आयोजन की आवश्यकता नहीं; कुछ मिनट का शांत जाप भी श्रद्धा से किया जाए तो उसका महत्व है।
देवी दुर्गा और भगवान शिव की उपासना
कई परंपराओं में राहु शांति के लिए देवी दुर्गा की उपासना और भगवान शिव की पूजा की जाती है। कुछ परिवार दुर्गा सप्तशती का पाठ करवाते हैं, तो कुछ शिवलिंग पर जल अर्पित करते हैं। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार उपासना चुनें।
दान
परंपरा में राहु से जुड़ी वस्तुओं, जैसे उड़द, काले तिल, नीले या काले वस्त्र और कंबल, का दान बताया जाता है, विशेषकर शनिवार को। दान हमेशा अपनी सामर्थ्य के अनुसार और ज़रूरतमंद व्यक्ति को करें।
आचरण और संयम
शास्त्रों में ग्रह शांति के साथ अच्छे आचरण को भी बहुत महत्व दिया गया है: सत्य बोलना, बड़ों का सम्मान करना, नशे से दूर रहना और मन को स्थिर रखना। ये बातें हर स्थिति में जीवन के लिए उपयोगी हैं।
रत्न के बारे में
राहु के लिए कुछ लोग रत्न पहनने की सलाह देते हैं। रत्न पहनना ज़रूरी नहीं है, और बिना कुंडली को ठीक से देखे कोई रत्न नहीं पहनना चाहिए।
ध्यान रखने की बातें
डर से नहीं, श्रद्धा से
राहु का नाम सुनते ही कई लोग घबरा जाते हैं, पर परंपरा ग्रहों को डर का नहीं, आदर का विषय मानती है। राहु की महादशा जीवन का एक समय है, कोई सज़ा नहीं। अगर कोई आपको डराकर पूजा करवाने का दबाव डाले, तो रुककर सोचें। पूजा करवानी है या नहीं, यह आपकी अपनी इच्छा है।
नियम
- पूजा के दिन स्वच्छता, सात्विक भोजन और शांत मन रखें।
- संकल्प के लिए नाम, गोत्र (यदि पता हो) और जन्म विवरण (यदि हों) पहले से तैयार रखें।
- पूजा के बीच ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से दूर रहें।
पूजा किसी विशेषज्ञ सलाह का विकल्प नहीं
राहु पूजा श्रद्धा और परंपरा की साधना है। यह डॉक्टर, वकील या वित्तीय सलाहकार की सलाह का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य, कानूनी या आर्थिक विषयों में हमेशा संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें; पूजा उनके साथ आपकी प्रार्थना हो सकती है।
राहु पूजा कौन करवा सकता है
राहु पूजा कोई भी श्रद्धालु करवा सकता है, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष। यदि जिसके लिए पूजा हो रही है वह स्वयं उपस्थित न हो सके, तो परिवार का कोई सदस्य उसके नाम से संकल्प लेकर पूजा करवा सकता है। गोत्र पता न हो, तो पंडित जी परंपरा के अनुसार विकल्प बता देते हैं।
पूजा कौन करते हैं
राहु पूजा में आवाहन, जाप और हवन की पूरी विधि होती है, इसलिए यह योग्य पंडित से करवाना उचित है। कालीमठ एस्ट्रोलॉजी के माध्यम से देहरादून में राहु पूजा पंडित श्री प्रकाश बेंजवाल जी करते हैं, और यह केदारपुरम, पीलीकोठी, देहरादून में करवाई जा सकती है। यदि आप कालीमठ मंदिर चुनते हैं, तो पूजा मंदिर के अपने पुजारी पंडित श्री हर्ष देवशाली जी करते हैं। आप चाहें तो पूजा ऑनलाइन भी करवाई जा सकती है।
यह गाइड बी.एस. रावत जी ने लिखी है, जो ज्योतिषी हैं और जिन्हें 17 वर्षों का अनुभव है। कालीमठ एस्ट्रोलॉजी एक निजी ज्योतिष और पूजा सेवा है; यह कालीमठ मंदिर नहीं है और न ही उससे संबद्ध है।
देहरादून में राहु पूजा कैसे बुक करें
देहरादून में राहु पूजा का शुल्क: राहु शांति पूजा ₹21,000, पंडित श्री प्रकाश बेंजवाल जी द्वारा। कालीमठ मंदिर विकल्प: +₹5,000, मंदिर के अपने पुजारी द्वारा। आप चाहें तो पूजा ऑनलाइन भी हो सकती है। सभी पूजाओं के शुल्क के लिए पूजा शुल्क सूची देखें।
- व्हाट्सऐप या कॉल करें: +91 99772 50909 पर पूजा का नाम बताएँ, और यह भी कि पूजा देहरादून में, कालीमठ मंदिर में या ऑनलाइन चाहिए।
- विवरण भेजें: जिसके लिए पूजा है उसका नाम, गोत्र (यदि पता हो), जन्म विवरण (यदि हो) और पसंदीदा तारीख।
- हम पक्का करते हैं: बुकिंग से पहले पंडित जी, स्थान, तारीख और शुल्क आपसे तय कर लिए जाते हैं।
बुकिंग के बाद हम व्हाट्सऐप पर बता देते हैं कि पूजा के शुल्क में क्या शामिल है और आपको क्या साथ लाना है।
श्रद्धा, गारंटी नहीं
पूजा श्रद्धा और परंपरा की साधना है। कालीमठ एस्ट्रोलॉजी किसी परिणाम का वादा या गारंटी नहीं देती, और पूजा चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है। पूजा करवानी है या नहीं, यह हमेशा आपकी इच्छा है।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
राहु पूजा क्यों की जाती है?
राहु पूजा छाया ग्रह राहु के प्रति आदर और शांति की प्रार्थना के रूप में की जाती है। परिवार इसे प्रायः राहु की महादशा या अंतर्दशा में करवाते हैं। यह श्रद्धा की पूजा है, इससे किसी परिणाम की गारंटी नहीं दी जाती।
राहु पूजा किस दिन करनी चाहिए?
बहुत-सी परंपराओं में शनिवार को उपयुक्त माना जाता है, पर कोई एक दिन तय नहीं है। सही दिन और मुहूर्त पंडित जी पंचांग देखकर बताते हैं।
राहु का बीज मंत्र क्या है?
राहु का प्रचलित बीज मंत्र है: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।
राहु मंत्र का जाप कितनी बार करें?
जाप प्रायः 108 मनकों की माला से होता है। कुल कितना जाप करना है, यह पंडित जी आपकी स्थिति और परंपरा के अनुसार बता सकते हैं।
क्या राहु काल में राहु पूजा कर सकते हैं?
परंपरा में राहु काल में नए शुभ कार्य शुरू करने से बचा जाता है, जबकि कुछ पंडित राहु के जाप के लिए यही समय चुनते हैं। यह निर्णय पंडित जी पर छोड़ें।
राहु महादशा कितने वर्ष की होती है?
विंशोत्तरी दशा पद्धति में राहु की महादशा 18 वर्ष की मानी जाती है।
देहरादून में राहु शांति पूजा का शुल्क कितना है?
देहरादून में राहु शांति पूजा का शुल्क ₹21,000 है। कालीमठ मंदिर में पूजा करवाने पर ₹5,000 अतिरिक्त लगते हैं, और वहाँ पूजा मंदिर के अपने पुजारी करते हैं।
पूजा के शुल्क में क्या शामिल है?
बुकिंग से पहले शुल्क आपसे पक्का कर लिया जाता है। बुकिंग के बाद हम व्हाट्सऐप पर बता देते हैं कि पूजा के शुल्क में क्या शामिल है और आपको क्या साथ लाना है।