नवग्रह पूजा विधि, मंत्र और कब करें

नवग्रह पूजा सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, इन नौ ग्रहों की एक साथ की जाने वाली पारंपरिक पूजा है। इसमें संकल्प, गणेश पूजन, कलश स्थापना, नवग्रह मंडल पर ग्रहों का आवाहन और पूजन, हर ग्रह के बीज मंत्र का जाप, हवन और आरती होती है। इसके लिए कोई एक दिन तय नहीं है; परिवार प्रायः किसी शुभ मुहूर्त में, ग्रह दशा बदलने पर या किसी नए आरंभ से पहले यह पूजा करवाते हैं, और सही दिन पंडित जी पंचांग देखकर बताते हैं।

देहरादून में शुल्क
नवग्रह पूजा ₹21,000
कालीमठ मंदिर में
₹5,000 अतिरिक्त, मंदिर के अपने पुजारी द्वारा
पूजा करते हैं
पंडित श्री प्रकाश बेंजवाल जी (देहरादून) · पंडित श्री हर्ष देवशाली जी (कालीमठ मंदिर)
बुकिंग
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नवग्रह पूजा क्या है?

वैदिक ज्योतिष में जन्म कुंडली को नौ ग्रहों के माध्यम से समझा जाता है: सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु (बृहस्पति), शुक्र, शनि, राहु और केतु। इनमें राहु और केतु का कोई भौतिक शरीर नहीं माना जाता, इसलिए परंपरा इन्हें छाया ग्रह कहती है। नवग्रह पूजा में इन सभी नौ ग्रहों का एक ही अनुष्ठान में आदरपूर्वक आवाहन, पूजन और जाप किया जाता है, ताकि घर-परिवार में शांति, संतुलन और शुभता के लिए प्रार्थना की जा सके।

हमारी परंपरा में ग्रहों को देवता के रूप में पूजा जाता है। लगभग हर बड़े संस्कार, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत या किसी बड़े यज्ञ से पहले, नवग्रहों का पूजन किया जाता है। यही कारण है कि मंदिरों में भी नवग्रहों का अलग स्थान मिलता है। नवग्रह पूजा को कई लोग नवग्रह शांति पूजा भी कहते हैं; दोनों नामों से प्रायः एक ही अनुष्ठान समझा जाता है।

नवग्रह पूजा और किसी एक ग्रह की पूजा में अंतर

जब किसी एक ग्रह, जैसे शनि या राहु, के लिए प्रार्थना करनी हो, तो उस ग्रह की अलग शांति पूजा और जाप किया जाता है। नवग्रह पूजा में सभी नौ ग्रहों को एक साथ पूजा जाता है। जब कुंडली में एक से अधिक ग्रहों की बात हो, या परिवार बिना किसी विशेष ग्रह का नाम लिए सामान्य शांति के लिए प्रार्थना करना चाहे, तब नवग्रह पूजा चुनी जाती है। किसी एक ग्रह की पूजा में भी आरंभ में नवग्रहों का आवाहन किया जाता है, क्योंकि परंपरा सभी ग्रहों का सम्मान साथ रखने की सीख देती है। राहु से जुड़ी पूजा के बारे में विस्तार से जानने के लिए हमारी राहु पूजा विधि गाइड पढ़ें। यदि आप केवल राहु की शांति पूजा करवाना चाहते हैं, तो देहरादून में राहु पूजा का पृष्ठ देखें।

नौ ग्रह, उनके पारंपरिक दिन और समिधा

परंपरा में हर ग्रह का एक दिन माना गया है, और हवन में हर ग्रह के लिए अलग वृक्ष की लकड़ी, जिसे समिधा कहते हैं, अर्पित की जाती है। नीचे दी गई तालिका सामान्य परंपरा पर आधारित है; अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों की रीति में थोड़ा अंतर हो सकता है।

ग्रहपारंपरिक दिनहवन की पारंपरिक समिधा
सूर्यरविवारअर्क (मदार)
चंद्रसोमवारपलाश
मंगलमंगलवारखैर (खदिर)
बुधबुधवारअपामार्ग (चिरचिटा)
गुरुगुरुवारपीपल
शुक्रशुक्रवारगूलर (उदुम्बर)
शनिशनिवारशमी
राहुपरंपरा के अनुसार अलगदूर्वा
केतुपरंपरा के अनुसार अलगकुशा

नवग्रह पूजा कब करें: पूजा का सही समय

नवग्रह पूजा के लिए पूरे वर्ष में कोई एक दिन निश्चित नहीं है। परंपरा यह कहती है कि पूजा शुभ तिथि, शुभ नक्षत्र और शुभ मुहूर्त में हो। यह मुहूर्त पंडित जी पंचांग देखकर और जिसके लिए पूजा हो रही है उसकी जानकारी लेकर बताते हैं। इसलिए नीचे दी गई बातें केवल सामान्य जानकारी हैं, अंतिम निर्णय पंडित जी के परामर्श से ही लें।

किन अवसरों पर परिवार नवग्रह पूजा करवाते हैं

  • जब कुंडली देखने पर एक से अधिक ग्रहों के बारे में प्रार्थना करने की बात आए।
  • किसी ग्रह की महादशा या अंतर्दशा बदलने के समय, परिवार की श्रद्धा के अनुसार।
  • गृह प्रवेश, विवाह, नए व्यवसाय या किसी बड़े काम की शुरुआत से पहले।
  • जन्मदिन, संक्रांति या परिवार के किसी विशेष दिन पर, सामान्य शांति की प्रार्थना के रूप में।
  • जब परिवार बिना किसी डर के, केवल श्रद्धा से, घर-परिवार की सुख-शांति के लिए पूजा करना चाहे।

शुभ दिन और मुहूर्त

बहुत-से परिवार रविवार को नवग्रह पूजा करवाना पसंद करते हैं, क्योंकि सूर्य को ग्रहों में प्रमुख माना गया है। कुछ परिवार अपने कुल-पुरोहित की सलाह पर कोई और दिन चुनते हैं। सुबह का समय सामान्यतः पूजा के लिए उत्तम माना जाता है। तिथि और नक्षत्र का मिलान पंचांग से किया जाता है, इसलिए यह बात पहले ही पंडित जी से पूछ लें।

किन समयों से बचा जाता है

परंपरा में शुभ कार्यों के लिए राहु काल, ग्रहण का समय और सूतक या पातक के दिन टाले जाते हैं। परिवार में किसी जन्म या मृत्यु के बाद के नियम हर परिवार की रीति के अनुसार अलग होते हैं। ऐसी स्थिति हो तो बुकिंग के समय पंडित जी को अवश्य बताएँ, ताकि वे उचित दिन सुझा सकें।

नवग्रह पूजा विधि

नीचे नवग्रह पूजा की सामान्य पारंपरिक विधि दी गई है, ताकि आप समझ सकें कि पूजा में क्या-क्या होता है। वास्तविक पूजा में पंडित जी अपनी परंपरा और अवसर के अनुसार क्रम या विस्तार में बदलाव कर सकते हैं। पूजा की पूरी विधि योग्य पंडित से ही करवानी चाहिए।

1. तैयारी और शुद्धि

पूजा के दिन यजमान स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं। पूजा का स्थान साफ़ किया जाता है और पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठने की व्यवस्था की जाती है। आचमन और पवित्रीकरण के मंत्रों से शरीर और मन की शुद्धि की भावना की जाती है। दीपक जलाकर पूजा आरंभ होती है।

2. संकल्प

पंडित जी यजमान से हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर संकल्प कराते हैं। संकल्प में तिथि, स्थान, यजमान का नाम, गोत्र (यदि परिवार को पता हो) और पूजा का उद्देश्य बोला जाता है। संकल्प पूजा का आधार है, क्योंकि इसी से अनुष्ठान का भाव स्पष्ट होता है।

3. गणेश पूजन और कलश स्थापना

परंपरा के अनुसार हर शुभ कार्य श्री गणेश के पूजन से शुरू होता है, ताकि कार्य निर्विघ्न पूरा हो। इसके बाद जल से भरे कलश की स्थापना की जाती है, जिस पर आम के पत्ते और नारियल रखा जाता है। कलश में देवताओं और पवित्र नदियों का आवाहन किया जाता है। कई विधियों में इसके साथ गौरी पूजन और पुण्याहवाचन भी होता है।

4. नवग्रह मंडल की स्थापना

वेदी पर नवग्रह मंडल बनाया जाता है। परंपरा में सूर्य को मध्य में और बाकी ग्रहों को उनकी निर्धारित दिशाओं में स्थापित किया जाता है। हर ग्रह के लिए उसके पारंपरिक रंग के वस्त्र, अनाज और पुष्प का प्रयोग किया जाता है, जैसे सूर्य के लिए लाल और गुरु के लिए पीला रंग। मंडल की रचना हर क्षेत्र की परंपरा में थोड़ी अलग हो सकती है।

5. आवाहन और पूजन

मंडल पर एक-एक करके नौ ग्रहों का आवाहन किया जाता है, अर्थात् उन्हें आदरपूर्वक आमंत्रित किया जाता है। इसके बाद पंचोपचार या षोडशोपचार से पूजन होता है, जिसमें गंध, पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। साथ में ग्रहों के अधिदेवता और प्रत्यधिदेवता का भी पूजन किया जाता है।

6. मंत्र जाप

पूजन के बाद हर ग्रह के मंत्र का जाप किया जाता है। सामान्यतः बीज मंत्र या वैदिक मंत्र का प्रयोग होता है। जाप शांत मन और शुद्ध उच्चारण से किया जाता है। किस ग्रह के मंत्र का कितना जाप हो, यह पंडित जी पूजा के उद्देश्य और परंपरा के अनुसार तय करते हैं।

7. हवन

जाप के बाद हवन होता है। हवन कुंड में अग्नि प्रज्वलित करके हर ग्रह के मंत्र के साथ घी, हवन सामग्री और उस ग्रह की पारंपरिक समिधा की आहुति दी जाती है। अंत में पूर्णाहुति दी जाती है, जिसमें प्रायः नारियल अर्पित किया जाता है।

8. आरती, क्षमा प्रार्थना और दान

हवन के बाद आरती होती है और पूजा में जाने-अनजाने हुई किसी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना की जाती है। परंपरा में पूजा के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने का विधान है। दान श्रद्धा का विषय है, इसे किसी दबाव में नहीं करना चाहिए। अंत में प्रसाद बाँटा जाता है।

नवग्रह मंत्र

नवग्रह पूजा में हर ग्रह के लिए उसका बीज मंत्र बोला जाता है। ये मंत्र परंपरा में व्यापक रूप से प्रचलित हैं। नीचे नौ ग्रहों के बीज मंत्र दिए गए हैं। पूजा के समय इनका सही उच्चारण पंडित जी से सीखना अच्छा रहता है।

नौ ग्रहों के बीज मंत्र

ग्रहबीज मंत्र
सूर्यॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः
चंद्रॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः
मंगलॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः
बुधॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
गुरु (बृहस्पति)ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः
शुक्रॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः
शनिॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः
राहुॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः
केतुॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः

नवग्रह स्तुति

नौ ग्रहों की एक साथ प्रार्थना के लिए यह श्लोक बहुत प्रचलित है:

ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनिराहुकेतवः सर्वे ग्रहाः शान्तिकरा भवन्तु॥

इसका भाव है: ब्रह्मा, विष्णु, शिव, सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु, सभी ग्रह शांति देने वाले हों।

जाप की संख्या और माला

जाप प्रायः 108 मनकों वाली माला से किया जाता है। किस ग्रह के मंत्र का कितना जाप करना है, इसके बारे में अलग-अलग परंपराओं में अलग नियम हैं, इसलिए जाप की संख्या पंडित जी से पूछकर ही तय करें। यदि आप स्वयं जाप करना चाहें, तो एक माला से शुरुआत करके नियमितता बनाए रखना अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।

ध्यान रखने की बातें

श्रद्धा और नियम

  • पूजा के दिन स्वच्छता, सात्विक भोजन और शांत मन रखने की परंपरा है।
  • संकल्प के लिए जिसके नाम से पूजा हो रही है, उसका नाम और गोत्र (यदि पता हो) पहले से लिख कर रखें। जन्म विवरण हों तो वे भी तैयार रखें।
  • पूजा के बीच मोबाइल और बातचीत से दूरी रखें, ताकि ध्यान पूजा में रहे।
  • मंत्रों का उच्चारण जल्दबाज़ी में न करें; धीरे और स्पष्ट बोलना ही ठीक है।

डर से नहीं, श्रद्धा से पूजा करें

ग्रहों को डर का कारण बताना हमारी परंपरा का भाव नहीं है। नवग्रह पूजा एक प्रार्थना है, जो मन को शांत करती है और परिवार को एक साथ बैठकर ईश्वर का स्मरण करने का अवसर देती है। अगर कोई आपको डराकर पूजा करवाने को कहे, तो रुककर सोचें। पूजा करवानी है या नहीं, यह हमेशा आपकी अपनी इच्छा है।

पूजा किसी विशेषज्ञ सलाह का विकल्प नहीं

पूजा श्रद्धा और परंपरा की साधना है। इससे किसी परिणाम का वादा नहीं किया जाता। स्वास्थ्य, कानूनी या आर्थिक विषयों में हमेशा डॉक्टर, वकील या संबंधित विशेषज्ञ की सलाह लें। पूजा उनके साथ आपकी प्रार्थना हो सकती है, उनका स्थान नहीं।

नवग्रह पूजा कौन करवा सकता है

नवग्रह पूजा कोई भी श्रद्धालु करवा सकता है, चाहे वह स्त्री हो या पुरुष, युवा हो या बुज़ुर्ग। विवाहित दंपति प्रायः साथ बैठकर पूजा करते हैं। यदि जिसके लिए पूजा हो रही है वह स्वयं उपस्थित न हो सके, तो परिवार का कोई सदस्य उसके नाम से संकल्प लेकर पूजा करवा सकता है। गोत्र पता न हो, तो पंडित जी परंपरा के अनुसार उसका विकल्प बता देते हैं।

पूजा कौन करते हैं

नवग्रह पूजा में मंडल की रचना, आवाहन, मंत्र जाप और हवन की पूरी विधि होती है, इसलिए यह योग्य और अनुभवी पंडित से करवाना उचित है। कालीमठ एस्ट्रोलॉजी के माध्यम से देहरादून में नवग्रह पूजा पंडित श्री प्रकाश बेंजवाल जी करते हैं, और यह केदारपुरम, पीलीकोठी, देहरादून में करवाई जा सकती है। यदि आप कालीमठ मंदिर चुनते हैं, तो पूजा मंदिर के अपने पुजारी पंडित श्री हर्ष देवशाली जी करते हैं। आप चाहें तो पूजा ऑनलाइन भी करवाई जा सकती है।

यह गाइड बी.एस. रावत जी ने लिखी है, जो ज्योतिषी हैं और जिन्हें 17 वर्षों का अनुभव है। कालीमठ एस्ट्रोलॉजी एक निजी ज्योतिष और पूजा सेवा है; यह कालीमठ मंदिर नहीं है और न ही उससे संबद्ध है।

देहरादून में नवग्रह पूजा कैसे बुक करें

देहरादून में नवग्रह पूजा का शुल्क: नवग्रह पूजा ₹21,000, पंडित श्री प्रकाश बेंजवाल जी द्वारा। कालीमठ मंदिर विकल्प: +₹5,000, मंदिर के अपने पुजारी द्वारा। आप चाहें तो पूजा ऑनलाइन भी हो सकती है। सभी पूजाओं के शुल्क के लिए पूजा शुल्क सूची देखें।

  1. व्हाट्सऐप या कॉल करें: +91 99772 50909 पर पूजा का नाम बताएँ, और यह भी कि पूजा देहरादून में, कालीमठ मंदिर में या ऑनलाइन चाहिए।
  2. विवरण भेजें: जिसके लिए पूजा है उसका नाम, गोत्र (यदि पता हो), जन्म विवरण (यदि हो) और पसंदीदा तारीख।
  3. हम पक्का करते हैं: बुकिंग से पहले पंडित जी, स्थान, तारीख और शुल्क आपसे तय कर लिए जाते हैं।

व्हाट्सऐप पर बुक करेंकॉल करें +91 99772 50909

श्रद्धा, गारंटी नहीं

पूजा श्रद्धा और परंपरा की साधना है। कालीमठ एस्ट्रोलॉजी किसी परिणाम का वादा या गारंटी नहीं देती, और पूजा चिकित्सा, कानूनी या वित्तीय सलाह का विकल्प नहीं है। पूजा करवानी है या नहीं, यह हमेशा आपकी इच्छा है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नवग्रह पूजा क्यों की जाती है?

नवग्रह पूजा नौ ग्रहों के प्रति आदर और प्रार्थना के रूप में की जाती है। परिवार इसे सामान्य शांति, किसी नए आरंभ से पहले, या तब करवाते हैं जब कुंडली में एक से अधिक ग्रहों की बात हो। यह श्रद्धा की पूजा है, इससे किसी परिणाम की गारंटी नहीं दी जाती।

नवग्रह पूजा किस दिन करनी चाहिए?

कोई एक दिन तय नहीं है। बहुत-से परिवार रविवार या किसी शुभ तिथि को चुनते हैं। सही दिन और मुहूर्त पंडित जी पंचांग देखकर बताते हैं।

नवग्रह के बीज मंत्र कौन-से हैं?

सूर्य: ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः; चंद्र: ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चंद्रमसे नमः; मंगल: ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः; बुध: ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः; गुरु: ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः; शुक्र: ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः; शनि: ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः; राहु: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः; केतु: ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः।

नवग्रह मंत्र का जाप कितनी बार करें?

जाप प्रायः 108 मनकों की माला से होता है, पर जाप की कुल संख्या पूजा के उद्देश्य और परंपरा पर निर्भर करती है। यह पंडित जी से पूछकर ही तय करें।

क्या नवग्रह पूजा ऑनलाइन हो सकती है?

हाँ। आप चाहें तो नवग्रह पूजा ऑनलाइन करवाई जा सकती है। बुकिंग के समय बता दें, हम समझा देंगे कि यह कैसे होगी।

देहरादून में नवग्रह पूजा का शुल्क कितना है?

देहरादून में नवग्रह पूजा का शुल्क ₹21,000 है। कालीमठ मंदिर में पूजा करवाने पर ₹5,000 अतिरिक्त लगते हैं, और वहाँ पूजा मंदिर के अपने पुजारी करते हैं।

पूजा के शुल्क में क्या शामिल है?

बुकिंग से पहले शुल्क आपसे पक्का कर लिया जाता है। बुकिंग के बाद हम व्हाट्सऐप पर बता देते हैं कि पूजा के शुल्क में क्या शामिल है और आपको क्या साथ लाना है।

क्या नवग्रह पूजा से पहले कुंडली दिखाना ज़रूरी है?

नहीं। पूजा बुक करने के लिए कुंडली परामर्श ज़रूरी नहीं है। यदि आप पहले अपनी कुंडली समझना चाहें, तो परामर्श ले सकते हैं, पर यह आपकी इच्छा है।